मिटाना-विटाना तो इक दर्द देने वाली प्रक्रिया है
आगे आकर कुछ ऐसा लिखने की आदत नहीं जिसे आखिरकार मिटाना पड़े। क्योंकि सीखा यही है कि मिटाना-विटाना दरअसल, इक दर्द देने वाली प्रक्रिया है। वह भी किसी पत्रकार के लिए। यह बड़े शिद्दत से महसूस करता हूं। ऐसे में जब किसी पत्रकार की पूरी खबर ही मिटा दी जाए तो...
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खंभा
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[02 Jun 2009 18:53 PM]



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