गजल--मुस्कुरा कर जब गले दिलबर मिले--वीनस केसरी

आते हुए लोग गुरु जी श्री पंकज सुबीर जी के आर्शीवाद और गजल पढ़ कर उत्साहवर्धन करने वाले सुधि पाठकगण के कारण ही आज नियमित लिख पा रह हूँ एक साल पहले तक यह हाल था की साल भर में कोई आठ दस रचना लिख ली तो बहुत बड़ी बात थी और वो भी बेबहर बेकहन, अभी भी ऐसा नहीं लिख पा रहा... [पूरी पोस्ट]
writer venus kesari
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[02 Jun 2009 14:36 PM]

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