सृजन का बीज -- !
आओ! हम उस ज़मीन को सींचे जिसके अन्दर नन्हा बीज छटपटा रहा है अंकुरित होने को . आओ हम उस ज़मीन में खाद डाले जिसके अन्दर कोमल अंकुर लड़ रहा है कठोर परतों से अंकुरित होने को हमें विश्वास है हारना ही होगा उन परतों को; ज़र्ज़र होना ही है उन दीवारों को जिसक...
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Razia
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[02 Jun 2009 11:48 AM]



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