इतिहास और आख्यान की जुगलबंदी

अपनी बात उपनिवेशकालीन दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी विद्रोह पर एकाग्र हरिराम मीणा की रचना धूणी तपे तीर को यों तो उपन्यास की संज्ञा दी गई है, लेकिन यह इतिहास और दस्तावेज भी है। गल्प के अनुशासन में होने के कारण यह एक औपन्यासिक रचना है, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेज होन... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.माधव हाड़ा
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[02 Jun 2009 08:27 AM]

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