बिखरी कहानी के बाद

हृदय गवाक्ष तो क्या करूँ मैंऽऽऽ...?? क्या करूँ मैं अब्बू..?? किस के सहारे छोड़ दूँ इन दोनो नासमझों को जिनका पेट नही समझ पाता कि ये किस घर की औलाद हैं ? सुबह शाम भूख..भूख..! कहाँ से लाऊँ इन नासमझों के लिये अनाज..! सर्दी लगे तो कहाँ से लपेटूँ इन्हे गरम कपड़ों में.??... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान
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[01 Jun 2009 08:25 AM]

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