चंद गर्म बोसे

कहासुनी यादों की अलमारीकल रात फिर खोलीखुलते ही बिखर गयीहंसी की खनकपायल के कुछ टूटे घुँघरूउफक तक पहुंचता आँचलगर्म आगोश की दहकऔर सबसे नीचे की दराज़ मेंएक लिफाफा थाजिसमें मिले...चंद गर्म बोसे... [पूरी पोस्ट]
writer ऋषभ कृष्ण
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[01 Jun 2009 06:49 AM]

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