गली गली वह घूमता हैं।
कबाड़ी चिड़ियों का अलार्म सुनकर कूड़ॆ के ढेर में से वह उठता है। डाल कंधे पर प्लास्टिक का बोरा बिना खाये वह गली-गली घूमता है। देख उसे कुत्ते भोंकते है लोग नाक मुँह सिकोड़ते है। कड़ी धूप हो या ठुठरती ठंड़ बोरे से अपना शरीर वह ढकता फिरता है। जिन जगहों को देख...
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सुशील कुमार छौक्कर
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[01 Jun 2009 01:19 AM]



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