वे फक्कड थे ! .... कबीर थे ! ....

sandhya gupta वे नहीं रहे तब हमने उनके बारे में जाना वे सूर्य को दिये जाने वाले अर्ध्य का पवित्र जल थे बरगद की छाँह थे मंदिर की सीढ़ियाँ थे खेत में लगातार जुते हुए बैल थे संघर्ष के बीच जिजीविषा को बचाने की इच्छाओं की प्रतिमूर्ति थे वे राष्ट्र के निर्माण की कथा थे व... [पूरी पोस्ट]
writer sandhyagupta
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[31 May 2009 12:53 PM]

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