एक व्यंग: सुदामा फिर आइहौ....

व्यंग....... एक व्यंग: सुदामा फिर आइहौ.... सुदामा की पत्नी ने अपनी व्यथा कही .... ' हे प्राण नाथ ! या घर ते कबहूँ न बाहर गयो,यह पुरातन फ्रीज़ और श्वेत-श्याम टी०वी० अजहूँ ना बदली जा सकी.पड़ोस की गोपिकाएं कहती हैं 'हे सखी! आज-कल आप के बाल-सखा श्रीकृष्ण का राज दरबार... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[31 May 2009 06:21 AM]

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