तुम्हे कैसे याद करुँ भगत सिंह
यह कविता काफी पहले ब्लॉग पर लगायी थी ... पर तब ब्लॉग पर इतनी आवाजाही नही थी।) जिन खेतों में तुमने बोई थी बंदूकें उनमे उगी हैं नीली पड़ चुकी लाशें जिन कारखानों में उगता था तुम्हारी उम्मीद का लाल सूरज वहां दिन को रोशनी रात के अंधेरों से मिलती है ज़िन्दग...
[पूरी पोस्ट]
अशोक कुमार पाण्डेय
30
7
0
7
7
[31 May 2009 00:20 AM]



Shuffle








