थोड़ी सी ज़मीन, थोड़ा सा आसमान
कई बार दिल और दिमाग़ की कशमकश मे इतना उलझ जाते है की कुछ समझ ही नही आता क्या करे. सब कहते है दिल को अपने काबू में रखो वरना वो तो कभी ये माँगेगा कभी वो, दिमाग़ से चलो. पर फिर दिल होता ही क्यूँ है? और जब चलना दिमाग़ ही है तो दिल और दिमाग़ एक दिशा में क...
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Surbhi
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[30 May 2009 20:14 PM]



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