भरी जवानी में ऐसा आराम!

बकौल बेद मई की धड़कन बन्द होने वाली है। सूरज बेहद गुस्से में है। लेकिन मुझ पर कोई असर नहीं है। मेरा एसी चिन्तन चालू है। तमाम दुखों के साथ कुछ सुख भी मिल ही जाता है। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं एसी चिन्तन कर सकूं। लेकिन इस कमजोरी के बावजूद एसी चिन्तन... [पूरी पोस्ट]
writer वेद रत्न शुक्ल
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[30 May 2009 10:49 AM]

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