ख़त्म तो नहीं होंगे ना, वही बहुत है

परिचर्चा बंगलोर से गाँव जाने का रास्ता ५४ घंटे का है (यदि भारतीय रेल के समय सारणी पर विश्वास करें तो) पर मुझे कुल ६२ घंटे लगे. इसका पूर्वानुमान होने की वजह से मैं दो किताबें ले कर चला था. पर गर्मी, ट्रेन में पैंट्री कार का न होने की वजह से खाद्य पदार्थ व चाय... [पूरी पोस्ट]
writer कौतुक
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[29 May 2009 12:45 PM]

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