उदास सी तुम...
सुनो सुनयना, भरे-भरे से क्यों हैं तेरे नैना ग़म क्या है तुझको, देखो- मुझे दे दो ना... रूठी खुद से हो कि खफा हो जिंदगी से छोड़ो भी ना, मिलता क्या है यहाँ बँदगी से जो हुआ, हुआ - अब जाने दो ना... आओ ना- तमन्ना की राह पर चलेंगे मिलके खुली फ़िज़ा में साथ उड़े...
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क्षितीश
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[29 May 2009 11:53 AM]



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