संसदेव कुटुम्बकम्
अपनेराम के बापश्री अब इस दुनिया में नहीं हैं। 102 के होकर कूच कर चुके हैं। वे बड़े आदमी थे। इतने बड़े कि जिन्दगी भर खुद को छोड़कर बाकी समाज और परिवार के लिये मरते-खपते रहे। वह सब कुछ किया जिससे औरों को लाभ हो। पर, वही नहीं किया जो करना चाहिए था। मसलन...
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डॉ. कमलकांत बुधकर
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[29 May 2009 09:36 AM]



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