दुनिया का ढाँचा

Chashmebaddoor यूँ तो देह के भीतर छिपा है कहीं मन कहीं वो लोग जिसे भावों का पुंज कहते हैं लेकिन दुनिया का ढाँचा इसके बिल्कुल उलट है वहाँ मन दिखता है ऊपर-ऊपर, सब तरफ मित्रता भाईचारा, नैतिकता, लेकिन बस ऊपर-ऊपर. इसके ठीक नीचे बहुत गहरे बहुत विस्तृत फैली है देह देह की... [पूरी पोस्ट]
writer अपराजिता
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[29 May 2009 08:11 AM]

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