बादलों की नादाँ जिद
आकाश में बादलों ने तारों को ढक लिया, लोगो ने कहा, मौसम सुहावना हो गया, पर किसी ने न सोचा तारों कि घुटन को, तारे बेताब, वसुंधरा कि एक झलक के लिए, पहुचे शिकायत लिए सूरज के पास, सूरज ने समझाया, हे बादल! सिमेट ले खुद को, बादल बोला, इनका रूप, इनकी चमक मेर...
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Priya
मई २००९
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[29 May 2009 07:01 AM]



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