झोंके का इंतजार, मेंढक, पसीना और चंद आवाजें

नई इबारतें रात हो गई है. पास की नाली के पास रहता मेंढकों का परिवार एक लय में चीख रहा है. नहीं नहीं गा रहा है. शायद उनका कोई दुख उनसे छूट गया है. उस मेंढकी के परिवार में कितने लोग होंगे नहीं कह सकता पर वह अकेली नहीं होगी. प्यास होंठों को सुखाने लगी है और मैं अंध... [पूरी पोस्ट]
writer सचिन ..........

रात

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[29 May 2009 03:30 AM]

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