एक अन्जाना पथिक

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... आधी रात और सूनी सड़क, मैं अन्वरत चला जा रहा था, एक अन्भिग्य पथभ्रष्ट पथिक की तरह, जैसे अगले चौराहे पर कोई अपना सा मिल जाएगा, जैसे वो मुझ जैसे एक भटके हुए राहगीर को एक रास्ता दिखाएगा, मेरी मंज़िल तक ले जाएगा, और अचानक मुझे मिला भी, मिला मुझे समय, कुछ ज... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[29 May 2009 01:16 AM]

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