एक अन्जाना पथिक
आधी रात और सूनी सड़क, मैं अन्वरत चला जा रहा था, एक अन्भिग्य पथभ्रष्ट पथिक की तरह, जैसे अगले चौराहे पर कोई अपना सा मिल जाएगा, जैसे वो मुझ जैसे एक भटके हुए राहगीर को एक रास्ता दिखाएगा, मेरी मंज़िल तक ले जाएगा, और अचानक मुझे मिला भी, मिला मुझे समय, कुछ ज...
[पूरी पोस्ट]
Gurnam Singh Sodhi
18
2
0
2
1
[29 May 2009 01:16 AM]



Shuffle








