ऐना कियै छैक

परिचर्चा भोर भेल, ओ तैयार भेलाह. दुपहरिया भेल, ओ बिदा भेलाह. सांझ भेल, ओ पहुँच गेलाह. राति भेल, वो भेंट भेलाह. भोर भेल, ओ हेरा गेलाह. सुनालियैक, हमर बियाह भय गेल. हमारा देखलक. हमहूँ देखलियैक अस्त-व्यस्त घर, आओर ऐँठल लोक. जेना तेना, सामंजस भेल. साउस रुस्लीह, ख... [पूरी पोस्ट]
writer कौतुक
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[28 May 2009 23:52 PM]

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