सतोहल डायरी... (मंण्ड़ी, हिमाचल)

मौन में बात.. कल यहाँ से चले जाना है..’ की अंगड़ाई लेकर सुबह हुई....। चाय बनाते हुए भी एक खालीपन सा था। कुछ पढ़ते नहीं बना... सो मैंने पैदल जाना तय किया। चाय पीते हुए सेम भी उठ गया था... उसने कहाँ कि वह भी चलना चाहता है। हम दोनों के बीच बहुत देर तक संवाद शून्यता ब... [पूरी पोस्ट]
writer मानव
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[28 May 2009 22:46 PM]

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