उड़ती परियां
रंग बिरंगे पंखोंवाली ओ मनभावन तितली! किन कलियों की गलियों में तू अपना रूप लुटाने निकली? ओ बसंत की रानी तितली ! रंग बोलती तेरी भाषा ; तेरे साथ थिरकती रहती सबके मन की मंजुल आशा। रंग मखमली, अंग पवन सा, कली - कली की सगी सहेली; ओ तितली! तू लगती सुंदर परिय...
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गुर्रमकोंडा नीरजा
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[28 May 2009 10:50 AM]



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