भारतवासी....
एक कविता देश के निवसियों के नाम , जो मैंने २००५ में लिखी थी .....) टेढी मेढ़ी पगडण्डी पर , हवाएं दौड़ा करती हैं , पहाड़ों के सीने से लिपट कर , घटाएं बरसा करती करती हैं, रंग - बिरंगे पंछियों के, जहाँ कलरव गूंजा करते हैं , होली के रंगों सी बोली , सबके मन...
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Navnit Nirav
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[28 May 2009 09:05 AM]



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