कबीर अगर तुम न हुए होते
कबीर अगर तुम न हुए होते होते हम कितने निर्लज्ज और निष्ठुर तुम्हारी वाणियां और साखियां बार-बार स्मरण कराती हैं आदमी का कद कितना ओछा हो सकता है. कबीर अगर तुम न हुए होते तो होता केवल मिथ्या जगत तुम ही हो बटरोही बनकर मार्ग दर्शक आज भी अटल खड़े, अड़े...
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Neeraj
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[27 May 2009 20:32 PM]



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