मन और पतंग
बचपन में अकसर घर की छत पर खड़ी होकर आसमान में हवा के साथ बातें करती पतंगो को घंटों देखती थी. लाल, पीली, नीली हरी सब रंगो की पतंगे. पतंग को कभी ढील देते थे, कभी कसाव, एक दूसरे से बाज़ी मार जाने की चाह मे अपनी जान हथेली पर लिए ख़तरनाक मुंडेर और छतों पर...
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Surbhi
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[27 May 2009 18:29 PM]



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