awaak

. मैं सोया था इंतजार में कि नींद टूटे, अब जागा तो पाया सब अपने छूटे. नींद गहरी थी मैं भान ना पाया, परायों की शकल पहचान ना पाया. अवाक खड़ा चौराहे पर वह कौन है,मैं पूछता मन से- मन मौन हैं.... [पूरी पोस्ट]
writer durgesh
views
21
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
4
[27 May 2009 11:39 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix