"जिन्दा लाशों की बस्ती"

मेरा देश मेरा गाँव यूँ घूमते घूमते इस शहर में आ गया हूँ जिन्दा लाशों की किसी सुनसान बस्ती में आ गया हूँ हर कोई बैठा अपने ही कफ़न की तैयारी कर रहा है आदमी ही आदमी को नोच-नोच कर खा रहा है सोचा किसी हरे पेड़ की छाया में सुस्ता लेता हूँ पर यहाँ तो हर दरख्त सूखा नज़र आया है य... [पूरी पोस्ट]
writer sweet_dream
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[27 May 2009 10:28 AM]

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