एक व्यंग :लघु व्यथा -- लोमड़ी कथा ....
लोमडी ने ललचाई नज़रों से अंगूर देखा ।मुंह में पानी भर आया और लार टपक गई ।सोचने लग गई ....आहा! क्या रस भरे अंगूर होंगे...कितने मीठे होंगे...काश ! यह अंगूर अपने आप टपक जाता ...काश! यह अंगूर मैं तोड़ पाती... यही सोच उसने दो-चार जोरदार छलाँग भी लगाईं ।परन...
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आनन्द पाठक
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[27 May 2009 06:16 AM]



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