उस घर को मैंने देखा...फिर उंगलियों से उसकी उदासी को छुआ
मेरी एक बहुत पहले लिखी गयी कहानी का शीर्षक है 'खंडित स्त्रियां, नेहरू जी और अस्ताचल'। आज २७ मई है और यह कहानी २७ मई १९६४ की स्मृति में लिखी गयी थी। तब जब मैं १२ साल का था। उस कहानी को अगर आप पढे़ तो इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पं. जवाहरलाल नेहरू...
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Uday Prakash
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[27 May 2009 06:05 AM]



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