सुख और स्वतंत्रता ...... [कविता] - शिवेंद्र कुमार मिश्र

तृषा'कान्त' सुख और स्वतंत्रता स्मरणीय है जीवन यदि हो निरभ्र आकाश सा बदली हो या चमकती धूप छटती है क्योंकि छटनी है रह जाता है नीलाम्बर का एहसास व्यापक अनन्त सीमातीत क्या सीमाहीनता सुख है? हाँ तो क्यों बॅधता है इन्सान सीमाओं के अनन्त जाल में परिवार समाज राष्ट्र विश... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’
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[27 May 2009 03:30 AM]

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