एक एक्कनम एक, दो दूनी चार, तीन तियाँ नौ.. ..

कुछ तो है.....जो कि ! * ई लेयो, दुनिया चैन से रहने भी न दे.. और पूछे ’ बेचैन क्यों रहते हो ? " हम पहले ही ब्लागर से मोहोबत करके सनम.. रोते भी रहे.. हँसते भी रहे गुनगुनाय रहे थे, कि आजु एकु मोहतरमा हमसे पूछि बैठीं, " क्षमा करें डाक्साब, आप काहे के डाक्टर हैं ? &quo... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
views
6
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[02 May 2009 21:44 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix