सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है

परिचर्चा अपने आप ही छप जाता है जब खटर-पटर करती उँगलियों से तुम्हारा नाम, और मोबाइल पर नंबर लगते हुए जब ऑफिस से डायल हो जाया करती है तुम्हारा ही नंबर, तो सोचता हूँ जरूर मुझे तुमसे प्यार है. कालेज के दिनों की बात होती तो शायद दोस्तों को दिखाया करता तुम्हारा नाम... [पूरी पोस्ट]
writer कौतुक
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[26 May 2009 09:57 AM]

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