नई चाल में ढली सियासत
सबसे पहले माफी चाहता हूं भाई अशोक पांडे से। यह टीप लिखनी थी कबाड़खाने के लिए लेकिन ब्लॉग खोला तो पता चला कि पहलू बेचारा रो रहा है कि एक महीने से यहां कुछ नहीं पड़ा। बहरहाल, अगली राजनीतिक टीप वहीं पड़ेगी, यह वादा रहा। चुनाव नतीजे जो आए, उनका अनुमान कि...
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चंद्रभूषण
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[26 May 2009 09:54 AM]



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