प्यार को मजबूर मत करो

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... रेत हाथ मे हो तो मुट्ठी बंद मत करो, रिश्तों को खुद से बंधे रहने पर मजबूर मत करो, अन्जलि को कसने से पानी नहीं टिकता, वहीं ओस की बूँदें चिकने पत्तों पर भी ठहर जाती हैं, रिश्तों में ज़रुरत है एक दूसरे के दिल की बात सुनने की, बस अपनी बात मनवा कर अपना हक़... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[26 May 2009 01:05 AM]

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