तुम्हें याद है प्रिये
तुम्हें याद है प्रिये - उस व्यस्त सड़क का सुनसान किनारा? जहाँ तुम्हारे हाथों में मेरा हाथ ऐसा चिपका था जैसे हम सोख लेना चाहते हों - एक दुसरे को. जहाँ मैंने घूरते हुए लोगों को नज़रंदाज करने की कला सीखी थी और तुम्हें अपनी ओर इस बेताबी से खींच लिया था -...
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विकास कुमार
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[25 May 2009 16:20 PM]



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