मुंबई की बात निराली...:- 3
तीन दिनों के बाद आज फिर अपना एक अनुभव लिखने बैठा हूं, जो ढाई सालों से मैं लोकल में देखा रहा हूं। हार्बर लाइन की उस ट्रेन में वह लड़की रोज मुझे मिलती है। मैले-कुचैले कपड़े, बाल एक-दूसरे में उलझे हुए, आवाज से लेकर आखों में दीनता की झलक, जैसा कि एक भीख...
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रवि रावत
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[25 May 2009 09:59 AM]



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