रोज़ का सफर....

mahua सपने खत्म नहीं होते.....आंखे उन्नीदीं नहीं होती....सोते,जागते...सपनो को लिए गजब संसार बनाए घूमती हैं......वक्त बस गुज़रता सा जाता है......दिन बीतता है.....रात उतरती है....कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं....सबकुछ अजीब एक खामोशी के साथ होता रहता है......सूरज क... [पूरी पोस्ट]
writer tanu sharma.joshi
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[25 May 2009 02:34 AM]

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