हारे हुए वामपंथ के वामपंथी
वाम दल हार चुके हैं। जनता के बीच भी और अपने बीच भी। यह हार बहुत तीखी और गहरी है। हार ने वाम दलों का दिन और रात का चैन छीन लिया है। वाम नेताओं के चेहरों पर से खुशी गायब है। माथे पर दुख की लकीरें हैं। गहरी। बहुत गहरी। जुबान खामोश है। टीवी और अखबारों मे...
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अंशुमाली रस्तोगी
नजरिया
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[25 May 2009 01:23 AM]



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