एक जंगल है तेरी आंखों में: दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल-मीनू पुरूषोत्तम की आवाज़ ।
पिछले दिनों मनीष ने अपने ब्लॉग पर 'दुष्यंत कुमार' की याद दिला दी । दी । और वो स्कूल-कॉलेजिया दिन याद आ गये जब मध्यप्रदेश के छोटे-से शहर सागर के दो पुस्तक भंडारों से दुष्यंत की 'साये में धूप' अकसर ख़रीदी जाती थी । होता ये था कि जो भी मित्र देखता...
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yunus
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[25 May 2009 01:13 AM]



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