कलंक से बच गई काशी
पाप नाशनी, मोक्षदायनी, अमृतजलधारा वाली गंगा चाहे जितनी प्रदूषित हो गई हो लेकिन देश के आम लोगों के लिए आज भी उनका वही स्वरुप है, जो पहले कभी रहा होगा। टिहरी में कैद होने से पहले या तमाम तटवर्ती कचरे और मल को आत्मसात करने से पहले। इसी गंगा के पावन तट प...
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बच्चन सिंह
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[25 May 2009 00:55 AM]



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