कलंक से बच गई काशी

बेबाक जुबां पाप नाशनी, मोक्षदायनी, अमृतजलधारा वाली गंगा चाहे जितनी प्रदूषित हो गई हो लेकिन देश के आम लोगों के लिए आज भी उनका वही स्वरुप है, जो पहले कभी रहा होगा। टिहरी में कैद होने से पहले या तमाम तटवर्ती कचरे और मल को आत्मसात करने से पहले। इसी गंगा के पावन तट प... [पूरी पोस्ट]
writer बच्चन सिंह
views
36
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
2
[25 May 2009 00:55 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix