मैं बैल हांकूंगा

मेरा कोना बाबू! यहां मन नहीं लगता ओझल हो रहा है सबकुछ बाबू... बस! बस! यहां मन नहीं लगता चलो, चलो... ये जगमग चांद सितारे नहीं बाबू मुझे मद्दिम सी डिबिया में रहना है यहां नहीं बाबू यहां मन नहीं लगता चिकनी जुबान, चिकने लोग, चिकना फर्श मेरा पैर फिसलता है बाबू! यहा... [पूरी पोस्ट]
writer archana rajhans
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[24 May 2009 21:22 PM]

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