शुभाशुभ की कसौटी पर छींक (जयपुर की पत्रिका ज्योतिष सागर दिसम्बर 2002 में प्रकाशित लेख )
भारतीय प्रष्ठभूमि में कुछ मान्यताएं व धारणाएं इस कद़र रची बसी हैं,कि समय असमय हमें प्रभावित करती हैं ।पहले लोग इन्हें स्वभावतः स्वीकारते थे, हमारे रामायण जैसे महाग्रंथ में भी छींक का उल्लेख किया गया है कि - दीख निषादनाथ भल टोलू । कहेउ बजाउ जुझाऊ ढोलू...
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रचना गौड़ ’भारती’
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[24 May 2009 13:58 PM]



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