मेरा नाम अन्हरी नही, रीता है...!
उस दिन मेरे गाँव में बड़ा अजीब वाकया हो गया था। एक गरीब के घर बारात आयी थी। अपनी क्षमता के अनुसार स्वागत सत्कार किया था उसने। दूल्हे को विवाह मण्डप में ले जाकर बिटिया का पाणिग्रहण करा दिया। दोनो कोहबर में गये। फिर एक विशेष रस्म करने के लिए दूल्हे को आ...
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रचना त्रिपाठी
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[24 May 2009 10:34 AM]



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