शरद बिल्‍लौरे की याद

गुल्लक मैं 1982 में प्रगतिशील लेखक संघ की होशंगाबाद इकाई का सचिव था। शरद बिल्‍लौरे का कविता संग्रह ‘तय तो यही हुआ था’ प्रगतिशील लेखक संघ ने ही प्रकाशित किया था। चर्चा के लिए यह पाठकमंच में भी आया था। सचमुच शरद भाई की कविताएं इतनी सहज और सरल थीं कि लगता जैसे... [पूरी पोस्ट]
writer राजेश उत्‍साही
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[24 May 2009 08:23 AM]

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