एक गीत : जिसको दुनिया के मेले में ....
जिसको दुनिया के मेले में ढूढा किया घर के आँगन के कोने मिली जिन्दगी उम्र यूँ ही कटी भागते - दौड़ते जिन्दगी खो गई जाने किस मोडे पे 'स्वर्ण-मृगया' के पीछे कहाँ आ गए ! रिश्ते-नाते ,घर-बार सब छोड़ के प्यास फिर भी मेरी अनबुझी रह गई आकर पनघट पर ,प्यासी रही ज...
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आनन्द पाठक
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[23 May 2009 12:22 PM]



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