अपने......

Meri Kavitayein मैंने अपने सीनियर्स के फेयर वेल पर कुछ पन्तियाँ लिखीं थीं जो आज मैं आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ ।) चल , चल के देख लें उनको , अभी जो अपने थे। सुबह गुलाबी धूप से , रातों में , आंखों के सपने थे। माना सफर नहीं था , मीलों का , माना शिकारा न था , झीलों का... [पूरी पोस्ट]
writer Navnit Nirav
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[23 May 2009 11:48 AM]

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