दलित, समाज, सरकार और हकीकत-6
हाल के दिनों में साहित्य और दलित चिंतन में मौलिकता और उभार देखने को आया है। इस सिलसिले में ऐसे लेखकों को खारिज कर देने की प्रबृत्ति भी बढ़ी है जो गैर-दलित हैं। दलित लेखकों का एक वर्ग कहता है कि दलितों को सहानुभूति का लेखन नहीं बल्कि स्व-अनुभूति का ले...
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sushant jha
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[23 May 2009 10:54 AM]



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