दाग झूठे हैं...
सच सुंदर होता है... और दाग अच्छे... आज तक यही कहा है मैंने... यही पढ़ा है... मैंने इन दागों पर सुंदर कविताएं लिखीं, और हर बार सुंदर धब्बों पर यकीन किया... मैं डूबा रहा रंगों में... गरारे करता रहा अपनी ही कविताओं के देर तक... मैंने इंद्रधनुष को सुंदर...
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देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
यादें
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[22 May 2009 18:19 PM]



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