थके - थके से कदम ...
कुछ दिनों के लिए इन्टरनेट से दूर रहूंगा इस लिए आप सभी से ओझल भी ये एक कविता नजर कर रहा हूँ आप सभी का स्नेह और आर्शीवाद चाहूँगा... हाँ जब भी मैं अपने थके - थके से कदम , घुटती साँसे , और टूटती धड़कनों , की तरफ़ बोझिल आंखों से , देखता हूँ , तो ये चमकती...
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"अर्श"
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[22 May 2009 03:51 AM]



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