वास्तविक ज्ञान

मंत्र-तंत्र-यंत्र विज्ञान कनखल के समीप गंगा किनारे महर्षि भारद्वाज और महर्षि रैभ्य के आश्रम थे। दोनों में मित्रता थी। रैभ्य और उनके दोनों पुत्र परम विद्वान् थे तथा लोक में सम्मानित भी। भारद्वाज तपस्वी थे, किन्तु अध्ययन में रूचि न थी। भारद्वाज के पुत्र यवक्रीत भी पिता की भांति... [पूरी पोस्ट]
writer Vikram

गुरु-शिष्य कथाएं

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[21 May 2009 12:46 PM]

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